अपनी स्थापना काल से ही परिषद् अपने उत्तरोत्तर वृद्धि की ओर बढ़ता गया फलस्वरूप 2005 ई0 के अधिवेशन में पढ़े गए शोध पत्रों के प्रकाशन हेतु तत्कालीन महामंत्री डॉ० ज्योति स्वरूप दुबे के मन में यह विचार आया कि इनके प्रकाशन हेतु एक पत्रिका की व्यवस्था भी की जाए। अतः 2006 ई० में 'पारमिता' वार्षिक पत्रिका ने आकार लिया जो अनवरत प्रकाशित हो रही है। 'पारमिता' नाम 'अखिल भारतीय दर्शन परिषद् के तत्कालीन अध्यक्ष प्रो० एस०पी० दुबे ने सुझाया था।
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दर्शन शास्त्र प्रतियोगिता के परिणाम घोषित।
लाइब्रेरी के समय में बदलाव किया गया है।