अखिल भारतीय दर्शन-परिषद् के 38वें अधिवेशन के अवसर पर पचमढ़ी में प्रो० छाया राय के मन में मध्यप्रदेश दर्शन परिषद् की स्थापना का विचार उत्पन्न हुआ। इसी दौरान परिषद् का गठन हुआ और प्रो० छाया राय को प्रथम अध्यक्ष तथा प्रो० सुरेन्द्र सिंह नेगी को महामंत्री बनाया गया।
हमीदिया महाविद्यालय, भोपाल द्वारा राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई जिसका विषय था "समकालीन परिदृश्य में दार्शनिकों की भूमिका"। इसमें अनेक प्रतिष्ठित दार्शनिकों ने भाग लिया और वरिष्ठ विद्वानों को 'दर्शन श्री' से सम्मानित किया गया।
मध्यप्रदेश के विभाजन के बाद छत्तीसगढ़ के दार्शनिकों ने भी परिषद् के साथ संयुक्त रूप से कार्य करने का निर्णय लिया।
जबलपुर में परिषद् का पहला स्वतंत्र अधिवेशन आयोजित हुआ। इसी समय परिषद् को भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद् से पहला अनुदान प्राप्त हुआ।
परिषद् का विधिवत पंजीयन किया गया तथा 'पारमिता' नामक वार्षिक पत्रिका का प्रकाशन प्रारंभ हुआ।
'पारमिता' पत्रिका को ISSN प्राप्त हुआ जिससे इसकी शैक्षणिक प्रतिष्ठा बढ़ी।
रीवा अधिवेशन में महामंत्री पद का परिवर्तन हुआ और परिषद् के संचालन में नई ऊर्जा का संचार हुआ।
परिषद् में स्थायी निधि के आधार पर पुरस्कार और व्याख्यानमालाओं के संचालन का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया।
कोरोना काल में परिषद् ने अनेक चुनौतियों का सामना किया। इसी दौरान अध्यक्ष प्रो० एस०एस० नेगी का निधन हुआ।
परिषद् के अधिवेशन निरंतर आयोजित होते रहे। सदस्य संख्या में वृद्धि हुई तथा नई वेबसाइट का निर्माण कर डिजिटल विस्तार किया गया।
आगामी राष्ट्रीय संगोष्ठी - अप्रैल 2026
नई सदस्यता पंजीकरण अब खुले हैं।
त्रैमासिक पत्रिका का विमोचन संपन्न।
दर्शन शास्त्र प्रतियोगिता के परिणाम घोषित।
लाइब्रेरी के समय में बदलाव किया गया है।